फासह का पर्व
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फसह का पर्व और प्रभु भोज
फसह का पर्व और प्रभु भोज
- दासत्व से याजक, रक्षक औरप्रबंधक : मिस्र देश में 400 साल के दासत्व के बाद, इसरायली वहाँ से निकल पड़े। उस रात को जब इस्त्रायली घराने के अगुवे ने मेमने को बलिदान किया वह अपने परिवार का याजक बन गया। जब मेमने के लोहू को दरवाज़े के चौखट पर छिड़का, तब वह रक्षक बन गया, और जब परिवार ने उस मेमने को पका कर खाया, वहप्रबंधक बन गया । (निर्गमन 12:7-12; 1 तीमोथी 5:8)
- तीन रोटियां: मसीही यहूदी तीन रोटियों को अलग अलग कपड़े में लपेट देतें है ( यह पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा को दर्शाते हैं)। लेकिन केवल बीच वाली रोटी (बेटे) को तोड़ते हैं|उसमे से आधी रोटी खाते है और आधी रोटी को पिता छिपा देता हैं। बाद में परिवार उस आधी रोटी को ढूंड कर खाते हैं। इस रोटी को ‘अफिकोमेन’कहते हैं। यह दर्शाता है कि येशुआ 3दिन और 3 रात कब्र में छुप गए थे।यहुदियों के लिए अफिकोमेन का मतलब “मै आने वाला हूँ” और मसीहों के लिये “मै आया“।
- दूसरा प्याला छुटकारा का कटोराकहलाता है क्योंकि परमेश्वर ने इज़राएल को महान कार्यों से मिस्र के दासत्व से छुड़ाया। इसे परमेश्वर के क्रोध का कटोरा भी कहते हैं क्योंकि परमेश्वर ने अपने क्रोध को मिस्रियों पर उंडेला था। प्रभु येशु ने संसार के पापों को उठा कर क्रूस पर ले गए और परमेश्वर के क्रोध को सहा. यहूदी इस कटोरे को नहीं पीते हैं, लेकिन अपनी ऊँगली उसमे डुबा कर हर विपत्ति का नाम लेकर उसे एक कपड़े पर छिड़क देते हैं। विपत्तियों के नाम ये हैं: लहू, मेंडक, जूई, मक्खी, जानवर, फोड़े, ओले, टिड्डे, घोर अंधकार और पहिलोटे की मृत्यु, याने उनके सारे इष्ट देवताओं को ध्वस्त कर दिया। (यशायाह 53:1-12; रोमियो 5:9)
- तीसरा उद्धार का कटोरा हैं क्योंकि परमेश्वर ने कहा, “मैं तुम्हें अपनी भुजा बढ़ा कर छुड़ाउँगा”। प्रभुजी ने क्रूस पर अपनी भुजा फैला कर अपने लोहू से हमे पाप के दासत्व से छुड़ाया। मसीही, प्रभुभोज में केवल तीसरे कटोरे को पीतें हैं। प्रभु ने कहा, “यह कटोरा मेरे लोहू में नई वाचा है; जब कभी पियो तो मेरे स्मरण के लिए ये ही किया करो।”(1कुरिन्थियों 11:25).
- प्रभु की ब्यारी (भोजन) दो लोंगों के बीच में एक वाचा (बेरिथ=बलिदान) का भोज है। प्रभु एक मेमने के समान अपनी देह और लोहू हमे देता है और हम उसके मृत्यु की घोषणा करने की शपथ लेतें हैं। “क्योंकि जब कभी तुम ये रोटी खाते और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आये प्रचार करते रहो।” (1कुरिन्थियों 11:26).
- पौलुस की चेतावनी : हम प्रभु भोज को किस तरह से अनुचित रीति से लेतें हैं :
- पासबान और सभा की बीचअलगाव होने से प्रभु भोज का लेना अनुचित रीति से हो जाता है। प्रभुजी के क्रूस पर मृत्यु होते ही मंदिर के अंदर का पर्दा उपर से नीचे तक फट गया, और परमेश्वर और आम आदमी के बीच की दीवार ख़त्म हो गयी। इसलिए अब पेशेवर पुरोहित की ज़रूरत नहीं है क्योंकि प्रभुजी ने लोहू से खरीदकर सारी कलीसिया को राजपदधारी याजकों का समाज बना दिया है। अब प्रभुजी ने दरवाज़ा खोल दिया ताकि सभी विश्वासी राजपदधारी याजक के हैसियत से एक बराबर होकर एक दूसरे से प्रेम, एक दूसरे की सेवा, एक दूसरे के लिए प्रार्थना करना, प्रोत्साहन देना, क्षमा करना और एक दूसरे का भला करने की सेवकाई खुद कर सकते हैं।इसलिए प्रभु भोज के समय चोगाधारी पास्टर एक तरफ और घेरे के दूसरे तरफ आम बिश्वासी का होना सरासर गलत है। (1पतरस 2:9; युहन्ना13:34,35; इफीसियों 2:13-15;4:32; गलाती 5:13; 1 थेस्सलोनिकों5:15).
- पैर न धोना : भोजन (बियारी) के पश्चात, प्रभुजी उठे और अपने शिष्यों के पैर धोये और कहा, “यदि मैं प्रभु और गुरु होकर तुम्हारे पैर धोए, तो तुम्हें भी एक दूसरे के पैर धोना चाहिए।” एक गुरु अपने शिष्यों के पैर धोकर ऐसा नमूना दिखाया जो नम्रता का बहुत बड़ा उदाहरण हैं। सही में प्रभुजी ने शिष्यों के पैरों का अभिषेक किया ताकि वह आज्ञा दे कि, “जैसे पिता ने मुझे भेजा है, वैसे में तुम्हे भेज रहा हूँ”। संत पौलुस भी कहते हैं, क्या ही सुंदर हैं वो पैर जो शांति का सुसमाचार सुनाते हैं।” प्रभु यीशु का अनुकरण कर के नए विश्वासियों के पैर धोकर उनकों मसीह की देह (कलीसिया) में सम्मलित करके उन्हें गवाही देने के लिए नहीं भेजना, प्रभुभोज का अनुचित तरीके से लेना है। (युहन्ना 13:13-15; 20:21; रोमियों 10:15)
- चौथा कटोरा - प्रशंसा का कटोरा है: क्योंकि परमेश्वर ने कहाँ “मैं तुम्हें अपनी प्रजा बनाने के लिए अपना लूँगा।” (निर्गमन 6:6,7. प्रकाशित5:10)
- प्रभुजी ने चौथा कटोरा पीने से इंकार कर दिया क्योंकि उस समय तक सलीब पर मृत्युं नहीं सहा था।उन्होंने कहाँ कि वह इस कटोरे को नए राज्य में पियेंगे जहाँ पर यह कटोराअनंतकाल के वाचा का कटोरा कहलायेगा, क्योंकि उस उत्सव के दिन, हर जाति, कुल, गोत्र, और भाषा के एक विशाल भीड़ में अपने लहू से ख़रीदे हुए पवित्र लोगों के साथ मिलकर प्रीतिभोज की संगती करेंगे।(लूका 22:18; मत्ती 26:29; उत्पत्ति17:7; गलाती 3:27-29; प्रकाशित वाक्य 5:9,10; 19:9)
- शीघ्र ही संसार के सारे राज्य हमारे परमेश्वर के राज्य हो जायेंगे: यह तब ही संभव होगा जब, “यह राज्य का सुसमाचार सारे संसार में प्रचारा जायेगा और फिर अंत आयेगा।”इसको पूरा होने के लिए हर विश्वासी को प्रभु भोज के संदेश को न केवल समझना है। परन्तु अपने जीवन और अपनी कलीसिया में लागू करना है।(मत्ती 24:14; प्रकाशित 11:15).
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उपवास / Fasting
सभी महान व्यक्तियों ने उपवास किया: आरम्भ ही से भविष्यवक्ताओं और सन्तो ने उपवास को महत्वता दी है। मूसा चालीस दिन और रात निराहार रहा (निर्गमन 34ः 28)। दानिय्येल (दानिय्येल 10ः 2-3),नहेम्याह (नहेम्याह 9ः 1-2), दाऊद (भजनसंहिता 109ः 24), और महारानी एस्तेर (एस्तेर 4ः 13-16), आदि ने कष्ट के समय में उपवास और प्रार्थना किया।
उपवास के द्वारा सारा देश विनाश से बचा: स्वयं राजा और नीनवे के एक लाख बीस हजार लोगों ने पशुओं समेत, उपवास किया, परिणाम स्वरूप परमेश्वर ने सारे देश को क्षमा कर दिया। (योना 4ः 11)
उपवास करो और जुंआ तोड़ो: भविष्यवक्ता यशायाह के अनुसार यदि हम सांसारिक अभिलाषा के लिए उपवास करेंगे तो हमारी प्रार्थनाएं नहीं सुनी जाएंगी। परमेश्वर उस उपवास से प्रसन्न होता है जब हम अन्याय के बंधुओं और अंधेर सहने वालों की जंजीरो को तोड़ देते हैं। जब हम अनाथो को अपने घर में लाकर, नंगों को वस्त्र पहिनाते, और प्रभु के दासों से मुंह नहीं मोड़ते। तब प्रकाश हम पर चमकता है और चंगाई हमारे पास आती है। जब हम उसे पुकारते हैं तब प्रभु शीघ्रता से सुनता है।(यशायाह 58ः 3-12)
उपवास या भोज: आज चर्च के अगुवे बड़े भोज के साथ न…
उपवास के द्वारा सारा देश विनाश से बचा: स्वयं राजा और नीनवे के एक लाख बीस हजार लोगों ने पशुओं समेत, उपवास किया, परिणाम स्वरूप परमेश्वर ने सारे देश को क्षमा कर दिया। (योना 4ः 11)
उपवास करो और जुंआ तोड़ो: भविष्यवक्ता यशायाह के अनुसार यदि हम सांसारिक अभिलाषा के लिए उपवास करेंगे तो हमारी प्रार्थनाएं नहीं सुनी जाएंगी। परमेश्वर उस उपवास से प्रसन्न होता है जब हम अन्याय के बंधुओं और अंधेर सहने वालों की जंजीरो को तोड़ देते हैं। जब हम अनाथो को अपने घर में लाकर, नंगों को वस्त्र पहिनाते, और प्रभु के दासों से मुंह नहीं मोड़ते। तब प्रकाश हम पर चमकता है और चंगाई हमारे पास आती है। जब हम उसे पुकारते हैं तब प्रभु शीघ्रता से सुनता है।(यशायाह 58ः 3-12)
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वर्तमान में फसह का पर्व / TODAY IS PASSOVER
महान आदेश (संक्षिप्त विवरण)
महान आदेश
तब यीशु ने उनके पास आकर कहा ‘‘स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिए जाओं और सब जातियों के लोगों को चेले बनाओं तथा उन्हें पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो, और जो जो आज्ञाएं मैंने तुम्हें दी है उनका पालन करना सिखाओ। और देखो, मैं युग के अन्त तक सदैव तुम्हारे साथ हूँ’’। (मत्ती 28ः18-20)
पहला चरण: जाओ - अधिकार के साथ जाना
(1) अधिकार के साथ जाना, (लूका 9ः1-2) (2) बांधो और खोलो, (मत्ती16ः19,18ः18) (3) सारी सृष्टी, (मरकुस 16ः15-20) (4) परमेश्वर का परिवार, (इफि.2ः19) (5) शत्रू की सारी सामर्थ, (लूका 10ः19) (6) जहां मसीह का नाम नही है। (रोमियों 15ः20)
दूसरा चरण: श्ष्यि बनाओं (1) फल लाने वाला, (यूहन्ना 15ः8 लूका 9ः1-2) (2) जो फल बना रहे, (यूहन्ना 15ः16) (3) बीज मरेगा तो फलेगा, (यूहन्ना 12ः24) (4) आज्ञा मनने वाला, (यूहन्न 8ः31) (5) आपसी प्रेम करना, (यूहन्ना 13ः35) (6) त्याग की भावना, (लूका 14ः26-27) (7) महान आदेश, (मत्ती 28ः18-20) तीसरा चरणः बपतिस्मा दो
(1) यीशु की मृत्यु मे मिलना, (रोमियों 6ः3-5) (2) पापों की क्षमा के लिये, (प्रे.काम 2ः38-39) (3) मसीह को पहनना, (गल.3ः27) (…
तब यीशु ने उनके पास आकर कहा ‘‘स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिए जाओं और सब जातियों के लोगों को चेले बनाओं तथा उन्हें पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो, और जो जो आज्ञाएं मैंने तुम्हें दी है उनका पालन करना सिखाओ। और देखो, मैं युग के अन्त तक सदैव तुम्हारे साथ हूँ’’। (मत्ती 28ः18-20)
पहला चरण: जाओ - अधिकार के साथ जाना
(1) अधिकार के साथ जाना, (लूका 9ः1-2) (2) बांधो और खोलो, (मत्ती16ः19,18ः18) (3) सारी सृष्टी, (मरकुस 16ः15-20) (4) परमेश्वर का परिवार, (इफि.2ः19) (5) शत्रू की सारी सामर्थ, (लूका 10ः19) (6) जहां मसीह का नाम नही है। (रोमियों 15ः20)
दूसरा चरण: श्ष्यि बनाओं (1) फल लाने वाला, (यूहन्ना 15ः8 लूका 9ः1-2) (2) जो फल बना रहे, (यूहन्ना 15ः16) (3) बीज मरेगा तो फलेगा, (यूहन्ना 12ः24) (4) आज्ञा मनने वाला, (यूहन्न 8ः31) (5) आपसी प्रेम करना, (यूहन्ना 13ः35) (6) त्याग की भावना, (लूका 14ः26-27) (7) महान आदेश, (मत्ती 28ः18-20) तीसरा चरणः बपतिस्मा दो
(1) यीशु की मृत्यु मे मिलना, (रोमियों 6ः3-5) (2) पापों की क्षमा के लिये, (प्रे.काम 2ः38-39) (3) मसीह को पहनना, (गल.3ः27) (…
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