vestige प्रोडक्ट
*क्या मिलता है Networking करने से ?*
आपके सपने पुरे हो सकते हैं
चाहे वह कितने ही बड़े क्यों ना हो ।
अब मेरा पहला सवाल उन लोगों से है जिन्हें जब बिजनेस प्लान दिखाया जाता है तो वो कोई बहाना बना लेते है ।
*बहाना : समय नही है*।
*मेरा सवाल:* 25-30 हजार की नौकरी में किसी के इतने गुलाम बन गए हो कि 2-4 लाख कमाके अपने सपने पूरे करने की फुरसत नही है।
*बहाना : प्रोडक्ट महंगे है*।
*मेरा सवाल :* इतने सालों से बाजार के सस्ते प्रोडक्ट इस्तेमाल कर रहे हो फिर भी बच्चा या बीवी जब कोई चीज मांगती है तो कहते हो अगले महीने लेंगे ....और टालते रहते हो .....जब सस्ते समान से पैसा बचा रहे हो तो फिर जिंदगी में compromice क्यों कर रहे हो, खुद को कब तक बेवकूफ बनाओगे ?
*बहाना : फलाने से नही हुआ*।
*मेरा सवाल :* किसी का बच्चा स्कूल में फेल हो जाता है तो क्या तुम अपने बच्चे को पढ़ाना छोड़ देते हो या किसी ने शादी की और तलाक हो गया तो फिर तो आपने शादी ही नही की होगी ?
*बहाना : मुझे जरूरत नही है*।
*मेरा सवाल :* अंदर से बनियान फट रही है तब कहते हो अंदर कौन देखता है चलेगी ......दुकान में 2000 की शर्ट पसंद आती है तो दुकानदार से कहते ऐसी क्वालिटी की 500 की रेंज में दिखाओ.....10-20₹ की सब्जी ख़रीदते वक्त भाव ताव करके बेचारे गरीब का खून चूसते हो और मिर्ची धनिया फ्री में मांगते हो.......सोचो फिर भी जरूरत नही है ?
*बहाना : मुझे चेन/MLM/नेटवर्क मार्केटिंग में इंटरेस्ट नही है*।
*मेरा सवाल :* जब कोई मूवी देखते हो अच्छी लगती है तो 10 लोगों को बताते हो , किसी को paytm, bhim etc मोबाइल एप्प डाउनलोड करके 50₹ मिलते हो तो सारे व्हाट्सअप कॉन्टेक्ट्स को दिनभर मेसेज करते हो ..तब तो चेन बनाना अच्छा लगता है ?
*बहाना : यह मेरी फील्ड का काम नही , लोग क्या कहेंगे ?*
*मेरा सवाल :* मा बाप के लाखों रुपये लगा के जब इंजीनियरिंग, MBA फलाना ढिमका करके जब उस फील्ड की नौकरी नही मिलती तो कोई भी नौकरी करने को तैयार हो जाते हो ...तब फिकर नही होती कि यह मेरी फील्ड की नही है लोग क्या कहेंगे ?
*बहाना : मैं जुड़ा था पैसे नही आये इसलिए अब नही करना*।
*मेरा सवाल :* जीवन के 20-22 साल और लाखों रुपये लगाकर बैचलर/मास्टर डिग्री लेकर जब 15 हजार की भी नौकरी नही मिलती तो कॉलेज स्कूल में जाके शिकायत क्यों नही करते हो ? किसी कंपनी के ऑफिस में अपनी डिग्री देकर घर बैठ जाओ और बिना काम किये महीने की तनख्वाह क्यों नही मांगते हो ?
भाईसाब आपको लगता है कि बहाना बनाकर आपने मुझे मना कर दिया तो इसमें मेरा क्या गया ? क्योंकि मैं तो अपनी पसन्द के लोग ढूंढ रहा हूँ और मुझे मिल भी रहे है लेकिन आपका क्या ?....जिंदगी के 25-30-35-40 साल बीत गए खुद को बेवकूफ बनाते बनाते और कितना बनाओगे ?
बातें थोड़ी कड़वी है लेकिन हकीकत तो यही है कि आखिर आपकी जिंदगी की जिम्मेदारी कोई और क्यों लेगा यदि आप खुद लेने को तैयार नही हो तो ?
मुझे पता है कि मैं 10 लोगो से बात करूंगा तो 10 के 10 "हाँ" कभी नही कहेंगे लेकिन मैं यह भी जानता हूं कि 10 के 10 "ना" भी कभी नही कहेंगे ।
मेरा काम बताना था सो मैंने आपको एक वेहतरीन अवसर के संवंध में बताया है अब निर्णय आपका है क्योंकि जीवन भी आपका ही है परिवार भी आपका ही है तो निर्णय भी आपको ही करना होगा कि आपको उनको कैसा भविष्य देना है ।
*Wish You Wellth*
तीन चीज ही आपको वेस्टीज में सफलता दिला सकती है:-
1.आपको अपने ऊपर विश्वास करना होगा कि मैं सफल होऊंगा ही होऊंगा।
2.आपको वेस्टीज के सिस्टम पर विश्वास करना होगा।
3.आप जिस भी टीम में हैं उसमें जो आपके ग्रोइंग अपलाइन हैं उसपर 100% विश्वास।
आपको कोई भी सफलता नहीं दिला सकता है, यदि आपको कोई सफलता दिला सकता है तो वह हैं सिर्फ आप।
दुनिया में कोई भी रुमाल ऐसा नहीं बना है जो आपके आँसू पोछ सके।
हमारे घर के हाॅल में दो पंखे लगे हैं , जिनमें एक ही अक्सर चलता है और वही धूल लगकर गंदा हो जाता है।
जबकि जो नही चलता वह साफ रहता है |
बाहर से आने वाले उसी साफ दिखने वाले पंखे की तारीफ करते हैं जो नही चलता और कहते हैं कि उसी की तरह इस पंखे को साफ रखा करो !
क्या *जवाब* दूं ? उन्हें कैसे समझाऊं कि जो *जिम्मेदारी* लेता है वही गंदा होता हैं |
*"मशहूर हुए वो जो कभी क़ाबिल ना थे और तो और.... कमबख़्त मंजिल भी उन्हें मिली जो दौड़ में कभी शामिल ना थे.......!!*👌👌
#कल की सोच रखने वाले ही कुछ बड़ा करते हैं#.
कुंतालपुर का राजा बड़ा ही न्याय प्रिय था| वह अपनी प्रजा के दुख-दर्द में बराबर काम आता था| प्रजा भी उसका बहुत आदर करती थी| एक दिन राजा गुप्त वेष में अपने राज्य में घूमने निकला तब रास्ते में देखता है कि एक वृद्ध एक छोटा सा पौधा रोप रहा है|
राजा कौतूहलवश उसके पास गया और बोला, ‘‘यह आप किस चीज का पौधा लगा रहे हैं ?’’ वृद्ध ने धीमें स्वर में कहा, ‘‘आम का|’’
राजा ने हिसाब लगाया कि उसके बड़े होने और उस पर फल आने में कितना समय लगेगा| हिसाब लगाकर उसने अचरज से वृद्ध की ओर देखा और कहा, ‘‘सुनो दादा इस पौधै के बड़े होने और उस पर फल आने मे कई साल लग जाएंगे, तब तक तुम क्या जीवित रहोगे?’’ वृद्ध ने राजा की ओर देखा| राजा की आँखों में मायूसी थी| उसे लग रहा था कि वह वृद्ध ऐसा काम कर रहा है, जिसका फल उसे नहीं मिलेगा|
यह देखकर वृद्ध ने कहा, ‘‘आप सोच रहें होंगे कि मैं पागलपन का काम कर रहा हूँ| जिस चीज से आदमी को फायदा नहीं पहुँचता, उस पर मेहनत करना बेकार है, लेकिन यह भी तो सोचिए कि इस बूढ़े ने दूसरों की मेहनत का कितना फायदा उठाया है ? दूसरों के लगाए पेड़ों के कितने फल अपनी जिंदगी में खाए हैं ? क्या उस कर्ज को उतारने के लिए मुझे कुछ नहीं करना चाहिए? क्या मुझे इस भावना से पेड़ नहीं लगाने चाहिए कि उनके फल दूसरे लोग खा सकें? जो केवल अपने लाभ के लिए ही काम करता है, वह तो स्वार्थी वृत्ति का मनुष्य होता है|’’
वृद्ध की यह दलील सुनकर राजा प्रसन्न हो गया , आज उसे भी कुछ बड़ा सीखने को मिला था !
मुंगेरीलाल के सपने तो होते हसीन मगर पूरे कभी नहीं होते ।
होते सारे सपने पूरे Vestige में उनके जो अधूरे नहीं होते।
उतरो कर्तब्य-पथ पर,शतप्रतिशत मेहनत"गिरधर"।यकीनन पालिये सपने नयनों के झरोखे
में पीछा करते करते ।।
सुविधानुसार ग्रुपों में बंटे जरूर हैं जनाब नैया vestise की तो है़ एक।चलो खेते हैं नैया मिलकर एके की ताकत की मिसाल बनेगें अनेकानेक।। आज़माते चलें सिस्टम बनाते चलें मुकाम"गिरधर"। सकारात्मक का पी प्याला चल सीख मगर आगे देख ।।




Surendrabandhav@yahoo.com
8839133615





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